उन्नाव में प्रधानमंत्री आवास योजना पर सवाल! पात्र महिला को आवास न मिलने का आरोप, ग्राम पंचायत मित्र पर ₹20 हजार मांगने का दावा

 

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1. आवास सूची में नाम होने के बावजूद सीमा देवी को नहीं मिला घर, सरकारी योजना पर उठे सवाल

2. ₹20 हजार दो, तभी मिलेगा आवास और शौचालय! ग्राम पंचायत मित्र पर महिला ने लगाया आरोप

3. गरीब को आवास के लिए इंतजार, संपन्न लोगों को लाभ मिलने का दावा

4. करीब 58 लोगों की सूची में पात्रता पर सवाल, निष्पक्ष जांच की उठी मांग

उन्नाव। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, ताकि कोई भी पात्र परिवार कच्चे या जर्जर मकान में रहने को मजबूर न हो। लेकिन उन्नाव जिले के सिकंदरपुर सिरोसी ब्लॉक की ग्राम पंचायत बौनामऊ से सामने आए एक मामले ने योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों के चयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव की रहने वाली सीमा देवी पत्नी संजीवन का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में नाम होने के बावजूद उन्हें अब तक आवास का लाभ नहीं दिया गया।

ग्राम पंचायत मित्र पर 20 हजार रुपये मांगने का आरोप

सीमा देवी के मुताबिक, गांव के ग्राम पंचायत मित्र बुद्धिलाल ने उनसे कथित तौर पर 20 हजार रुपये की मांग की। महिला का आरोप है कि उनसे कहा गया कि पैसा देने पर आवास और शौचालय का लाभ मिल जाएगा। आरोप है कि ग्राम पंचायत मित्र ने यह भी कहा कि मांगी गई रकम ऊपर तक जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित ग्राम पंचायत मित्र और अन्य अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पैसे नहीं देने पर आवास से वंचित करने का आरोप

सीमा देवी का आरोप है कि कथित रूप से मांगी गई रकम देने से इनकार करने के बाद उन्हें आवास का लाभ नहीं मिला। महिला के अनुसार, इस मामले में खंड विकास अधिकारी की ओर से भी आवास देने से मना किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, अधिकारी ने किस आधार पर निर्णय लिया, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।

करीब 58 लोगों की सूची के सर्वे का दावा

महिला की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, गांव में लगभग 57 से 58 लोगों की सूची का सर्वे किया गया था। बताया गया है कि ग्राम पंचायत के मौजूदा प्रधान एवं ग्राम प्रशासक राममूर्ति ने इस सूची पर हस्ताक्षर भी किए थे। इसके बाद लाभार्थियों के चयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

संपन्न लोगों को आवास मिलने का दावा, जांच की मांग

सीमा देवी की ओर से आरोप लगाया गया है कि सूची में शामिल लोगों में से लगभग 30 लोगों को आवास का लाभ दिया गया। उनका दावा है कि इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनके पास ट्रैक्टर, बोलेरो और पक्का मकान जैसी संपत्ति है। यहां तक कि मौजूदा राशन विक्रेता को भी आवास का पात्र दिखाए जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन लोगों की वास्तविक आर्थिक स्थिति और सरकारी योजना के लिए उनकी पात्रता की पुष्टि संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकती है।

अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सीमा देवी योजना की पात्र लाभार्थी हैं, तो उन्हें आवास का लाभ क्यों नहीं मिला? क्या लाभार्थियों के चयन में निर्धारित नियमों का पालन किया गया? और क्या किसी ने योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे की मांग की?

इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच से ही सामने आ सकता है। जरूरत है कि जिला प्रशासन लाभार्थियों की सूची, सर्वे रिपोर्ट, पात्रता संबंधी दस्तावेजों और आवास आवंटन की प्रक्रिया की जांच कराए। यदि रिश्वत मांगने या अपात्र लोगों को लाभ देने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, यदि सीमा देवी पात्र पाई जाती हैं, तो उन्हें योजना का लाभ दिलाने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

तेज खबर लाइव न्यूज इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने और जांच की स्थिति स्पष्ट होने पर खबर को अपडेट करेगा।

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खास ब्यूरो रिपोर्ट हितेश कुमार सिंह प्रधान संपादक



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